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CG- ना बैंड बाजा…ना ही बारात और सात फेरे…यहां भगवान नहीं संविधान की शपथ लेकर रचायी गयी शादी

 

CG- ना बैंड बाजा…ना ही बारात और सात फेरे…यहां भगवान नहीं संविधान की शपथ लेकर रचायी गयी शादी

 

(Blueink.in)  Jashpur News: यूं तो शादी या तो अग्नि को साक्षी माकर रचायी जाती है या फिर कोर्ट मैरिज होती है। ईश्वर और अल्लाह के नाम भी शादी के वचन लिये जाते हैं, लेकिन जशपुर जिले के पत्थलगांव में शादी की अनूठी खबर सामने आयी है। सरहद से लगी ग्राम पंचायत कापू में सम्पन्न हुई एक अनोखी शादी हुई है। शादी में न सात फेरे और ना ही बैंड बाजा,  बल्कि गुरु घासीदास जयंती के मौके पर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम में भारत का संविधान की शपथ लेकर शादी रचा ली गयी।

इस अनोखी शादी को दुल्हा- दुल्हन के माता-पिता के साथ समाज के लोगों ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपना आशीर्वाद दिया है।  इस अनोखी शादी में दूल्हा और दुल्हन ने गुरु घासीदास जयंती  पर शादी करने के बाद आज इस की सभी लोग सराहना कर रहे हैं। यह शादी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनने के बाद अन्य लोग इससे प्रेरणा लेने की बात कर रहे हैं। सात फेरे लेने की जगह संविधान की शपथ लेकर शादी की. न फेरे, न मंगलसूत्र, न मांग में सिंदूर कापू क्षेत्र में एक बेहद ही अनोखे तरीके से शादी हुई।

यहां पर वर-वधु ने बाबा साहेब अंबेडकर की फोटो के सामने संविधान की शपथ लेकर जीवनभर के लिए एक-दूसरे का हाथ थामा लिया। किसी तरह का वैदिक मंत्रोच्चार नहीं हुआ. सिर्फ संविधान की प्रस्तावना की शपथ ली गई और एक दूसरे को वरमाला पहनाकर बेहद सादगी के साथ शादी हुई. दूल्हा और दुल्हन के परिजनों का मानना है कि इस तरह शादी से खर्चों में कमी तो आएगी और लोगों में संविधान के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

इधल लोगों का कहना है कि अनुसूचित जाति के लोग भारत का संविधान को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। इसी भावना से प्रेरित होकर इस युगल ने भी गुरु घासीदास जयंती के मौके पर इस अनोखी शादी का निर्णय लिया है। इसमें फिजुल खर्ची से दूर रहकर सादगी से सुदृढ़ विवाह का संदेश दिया गया है। इस शादी की सभी लोग सराहना कर रहे हैं।