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नवरात्रि के प्रथम दिन से ही मां सर्वमंगला मंदिर में सुबह से शाम तक मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगा हुआ है

नवरात्रि के प्रथम दिन से ही मां सर्वमंगला मंदिर में सुबह से शाम तक मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगा हुआ है

(Blueink.in) कोरबा जिले के हसदेव नदी के तट पर स्थित मंदिर में मां सर्वमंगला विराजमान है  माता की आस्था लोगों में बनी हुई है नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो गई है आदिशक्ति माता का उपासना और जिले मे सभी देवी के मंदिर में भक्ति का माहौल छाया हुआ है इस चैत्र नवरात्रि में सर्वमंगला मंदिर में सुबह से शाम तक मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को भीड़ उमर पड़ी है हसदेव नदी के किनारे स्थित मंदिर यह कोरबा जिले से नहीं बल्कि दूर-दूर से सभी कोने-कोने से अपनी महिमा के लिए जाना जाता है मंदिर के पुजारी के कहना है कि मां सर्वमंगला के दर्शन से ही यहां मांगी मुराद जलद तक पूरी हो जाती है यही कारण है कि राज्य नहीं बल्कि सात समुंदर पार देश विदेश के लोग मां के दर्शन और ज्योति कलश जलाने के लिएआते है मां सर्व मंगल मंदिर को धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि एक ऐसा केंद्र है जो सभी को जोड़ता है और उन्हें उम्मीद शक्ति प्रदान करता है और उन्होंने यह भी बताया कि यह मंदिर लगभग 124 साल पुराना है इस मंदिर में इतनी आस्था है कि लोग दूर-दूर से दर्शन के लिए काफी संख्या में श्रद्धालूगढ़ यहां आते हैं और पूजा अर्चना मां से विनती करते हैं इस नवरात्रि में 7हजार सात सौ तेल के दीए और 700 गिह के दिए जलाए जाते हैं और यह अपनी अपनी आस्था से छोटे-छोटे बच्चों का मुंडन  के लिए दूर दूर से आते है और यहां नौ दिनों तक अलग-अलग देवियों की पूजा की जाती है और नौ दिनों तक भोग और भंडारे का आयोजन किया जाता है और साथ ही पेयजल का भी व्यवस्था किया गया है मंदिर प्ररांगण में किया गया है मंदिर के अंदर और बाहर लगभग 17 सीसी कैमरे लगाए गए हैं जो आने वाले श्रद्धालुओं निगरानी रखी जा सके और आ सामाजिक तत्वों को निपटाने के लिए काफी काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं जो वहां सुबह शाम निगरानी रखते हैं मंदिर के बाहर मेला सा लगा हुआ है जहां सभी प्रकार के समान का स्टाल लगा है और छोटे बच्चों के लिए झूला का व्यवस्था किया गया है

आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है, और इस दिन मां कुष्मांडा माता की पूजा अर्चना की जाती है

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, और प्रत्येक दिन एक विशेष रूप की पूजा का महत्व होता है. 

कूष्माण्डा देवी को ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी के रूप में माना जाता है, और उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास मिलता है. 
इस दिन देवी को पीली वस्त्र, पीला फल और पीली मिठाई का भोग लगाया जाता है. 
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, पांचवे दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.