अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोरबा वन मंडल के सभी छह परिक्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों का सफल आयोजन
वैर्श्वि प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना के अनुरूप संपादित की गईं अत्यंत अनिवार्य गतिविधियां
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत वन मंडल कोरबा में दिनांक 22 मई 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ के विशेष अवसर पर आवश्यक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वन मंडल के सभी परिक्षेत्रों—लेमरू, बालको, कोरबा, करतला, पसरखेत एवं कुदमुरा में परिक्षेत्र स्तरीय व्यापक गतिविधियों का संपादन किया गया।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2026 के लिए निर्धारित मुख्य थीम “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना” को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से, स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और वन सुरक्षा दलों के सहयोग से कई महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य गतिविधियां सुनिश्चित की गईं।

सभी छह परिक्षेत्रों में संपादित की गई मुख्य-मुख्य गतिविधियां परिक्षेत्रवार निम्नानुसार हैं:
1. वन परिक्षेत्र लेमरू
स्थानीय जैव विविधता संरक्षण कार्यशाला: लेमरू परिक्षेत्र के अंतर्गत समृद्ध वनस्पति और वन्यजीवों के संरक्षण हेतु स्थानीय ग्रामीणों एवं वन प्रबंधन समितियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
पारिस्थितिकी संतुलन जागरूकता: वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को बचाने के लिए स्थानीय जंगलों और उनके प्राकृतिक आवासों को अक्षुण्ण रखने की शपथ ली गई।
2. वन परिक्षेत्र बालको
जैव विविधता और संवेदनशील आवासों की सुरक्षा: औद्योगिक क्षेत्रों के समीप स्थित वन क्षेत्रों में जैव विविधता के संरक्षण और वन्यजीवों के सुरक्षित विचरण पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई।पर्यटन स्थल की सफाई: बालको वन परिक्षेत्र के प्रसिद्ध केंटर पिकनिक स्पॉट (झरना क्षेत्र) में एक संयुक्त संपूर्ण स्वच्छता अभियान चलाया गया।
प्लास्टिक मुक्ति: वन परिक्षेत्र अधिकारी बालको, विभागीय स्टाफ और वन प्रबंधन समिति के सदस्यों ने मिलकर इस पूरे पिकनिक स्पॉट को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराया। अभियान में स्थानीय लोगों की भागीदारी वैश्विक मानकों (Global Standards) के अनुरूप सुनिश्चित की गई।
3. वन परिक्षेत्र कोरबा
स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र संवर्धन: कोरबा मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में लुप्तप्राय स्थानीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण और वनों के महत्व पर सामुदायिक सहभागिता: वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर छोटे-छोटे बदलावों और जन-भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
4. वन परिक्षेत्र करतला
पक्षी एवं वन्यजीव संरक्षण अभियान: करतला परिक्षेत्र में पाए जाने वाले विशिष्ट प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों (जैसे एशियन ओपनबिल स्टॉर्क) तथा अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। करतला वन परिक्षेत्र के बरमार परिसर अंतर्गत बरमार तालाब में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत तालाब को प्लास्टिक कचरे के साथ-साथ हानिकारक खरपतवार से भी पूरी तरह मुक्त कराया गया। ग्रामीणों की बैठक लेकर उन्हें जैव विविधता संरक्षण के प्रति समझाइश दी गई। इस अवसर पर आयोजित मुख्य स्वच्छता कार्यक्रम में करतला ब्लॉक की जनपद अध्यक्ष श्रीमती अशोका कंवर विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में वन अमले और ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। ग्रामीणों को कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी देते हुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वनों की रक्षा के दायित्वों से अवगत कराया गया।
5. वन परिक्षेत्र पसरखेत
वन्यप्राणी पर्यावास प्रबंधन: पसरखेत के सघन वन क्षेत्रों में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जलस्रोतों के प्रबंधन और जीवों के संतुलन पर विशेष कार्य योजना साझा की गई। वनों में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और प्राकृतिक संपदा को सहेजने हेतु स्थानीय स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। वन परिक्षेत्र के संवेदनशील एवं अति-संवेदनशील वन क्षेत्रों में ‘एंटी स्नेयर वॉक’ (Anti-Snare Walk) का आयोजन किया गया। इस दौरान वन्यप्राणियों के शिकार के लिए बिछाए जाने वाले फंदों (स्नेयर्स) की सघन खोजबीन की गई। साथ ही, शिकार के उद्देश्य से लगाए गए अवैध विद्युत कनेक्शनों को ढूंढकर तत्काल विच्छेदित (काटा) किया गया। परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छिनकोना तालाब में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर उसे पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाया गया। इन सभी कार्यों में वन विभाग के समस्त स्टाफ, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों और NGOs का सक्रिय सहयोग रहा। इसके अतिरिक्त जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया।
6. वन परिक्षेत्र कुदमुरा
कुदमुरा परिक्षेत्र में वन्यजीवों (विशेषकर हाथी दलों) की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव द्वंद्व को न्यूनतम करने के लिए स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। जलाशय स्वच्छता: कुदमुरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत स्थित लबैड परिसर के लबैड जलाशय में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। वन स्टाफ, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों के पूर्ण सहयोग से इस जलाशय को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त किया गया, ताकि जलीय पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। जैव विविधता को समृद्ध करने तथा वनों को आकस्मिक खतरों (जैसे वनाग्नि) से बचाने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर विशेष रणनीति तैयार की गई।
अधिकारियों का संदेश:
वन मंडल कोरबा के अधिकारियों द्वारा इस अवसर पर संदेश दिया गया कि वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का एकमात्र रास्ता यही है कि हम अपने स्थानीय स्तर पर सजग रहें। जब तक हमारे स्थानीय जंगलों, वन्यप्राणियों और जैव विविधता को नहीं बचाया जाएगा, तब तक वैश्विक स्तर पर कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है। आज संपन्न हुई ये सभी गतिविधियां इसी दिशा में वन विभाग और आम जनता का एक साझा और अत्यंत आवश्यक कदम हैं।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी परिक्षेत्र अधिकारियों, वन रक्षकों, वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों और प्रबुद्ध नागरिकों का सराहनीय योगदान रहा।
– वन मंडल अधिकारी (DFO)
कोरबा वन मंडल, छत्तीसगढ़
















































































































































































































































































































































































































































