नर्सिंग कॉलेज या व्यवस्था का मजाक? 6 पद खाली, बस की सुविधा नहीं, 4 KM पैदल अस्पताल पहुंच रहीं छात्राएं”
6 शिक्षक पद खाली, 86 छात्राएं पढ़ रहीं! कोरबा के GNM कॉलेज में नर्सिंग शिक्षा का सिस्टम वेंटिलेटर पर?
एक दशक से स्थायी भवन नहीं, शिक्षक भी नहीं; सीनियर छात्राएं पढ़ा रहीं जूनियर को, प्रैक्टिकल के लिए 4 किलोमीटर तक सफर
कोरबा। जिस नर्सिंग शिक्षा के भरोसे भविष्य में मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने वाली नर्सें तैयार होनी हैं, उसी सरकारी GNM कॉलेज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोरबा में संचालित सरकारी GNM कॉलेज में शासन द्वारा स्वीकृत 6 के 6 शिक्षक पद वर्षों से रिक्त हैं। कॉलेज का अपना स्थायी भवन भी नहीं है और वर्तमान में सुभाष चौक के पास स्थित वर्किंग वूमंस हॉस्टल में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नर्सिंग जैसे संवेदनशील पेशे की पढ़ाई कराने के लिए स्वीकृत शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं, तो छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण आखिर कौन दे रहा है?
शिक्षक नहीं तो सीनियर छात्राएं बनीं शिक्षक!
कॉलेज में एक प्राचार्य पदस्थ हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत 3 कर्मचारियों की स्थानीय स्तर पर व्यवस्था कर छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। ये कर्मचारी B.Sc. Nursing की योग्यता रखती हैं, लेकिन उनके ऊपर विभागीय जिम्मेदारियां भी हैं।
नतीजा यह है कि वे नियमित रूप से कॉलेज में कक्षाएं नहीं ले पातीं। कई बार सीनियर छात्राओं को ही जूनियर छात्राओं को पढ़ाना पड़ता है।
यानी जिस संस्थान से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ तैयार होना है, वहां शिक्षक की जगह छात्राएं ही एक-दूसरे की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने को मजबूर हैं।
यह सिर्फ शिक्षा व्यवस्था का सवाल नहीं है। यह सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा सवाल है।

6 पद स्वीकृत, लेकिन नियुक्ति शून्य!
शासन ने कॉलेज के लिए 6 शिक्षकों के पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन वर्षों से सभी पद रिक्त बताए जा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को पत्राचार किए जाने की बात कही गई है, मगर अब तक नियमित नियुक्ति नहीं हो सकी है।
सवाल सीधा है—
जब पद स्वीकृत हैं तो नियुक्ति क्यों नहीं?
क्या वर्षों से पत्राचार करना ही समाधान है?
क्या रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है?
और सबसे महत्वपूर्ण—
86 छात्राओं के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
86 छात्राएं, लेकिन शिक्षकों की कमी!
वर्तमान में सरकारी GNM कॉलेज में कुल 86 छात्राएं अध्ययनरत बताई जा रही हैं। प्रथम वर्ष में 30 सीटें स्वीकृत हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
थ्योरी की कक्षाएं प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। छात्राओं को कई बार आपस में पढ़ना-पढ़ाना पड़ता है।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि परीक्षा में किसी तरह पास होना ही क्या नर्सिंग शिक्षा का उद्देश्य है, या फिर छात्राओं को वास्तव में इतना सक्षम बनाना जरूरी है कि वे अस्पताल में मरीजों की जिम्मेदारी सुरक्षित तरीके से संभाल सकें?
4 किलोमीटर दूर अस्पताल, लेकिन बस तक नहीं!
GNM छात्राओं को प्रैक्टिकल और क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाना पड़ता है। वर्किंग वूमंस हॉस्टल से अस्पताल की दूरी करीब 4 किलोमीटर बताई जा रही है।
लेकिन कॉलेज स्तर से छात्राओं के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है।
छात्राएं अपने साधन से या कई बार पैदल अस्पताल जाने को मजबूर होती हैं।
यहां एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है—
अगर अस्पताल ड्यूटी के लिए जाते समय किसी छात्रा के साथ दुर्घटना हो जाती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
कॉलेज प्रशासन की?
स्वास्थ्य विभाग की?
जिला प्रशासन की?
या फिर उस छात्रा और उसके परिवार की?
जब छात्राओं को सरकारी प्रशिक्षण के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है, तो उनके सुरक्षित आवागमन की जिम्मेदारी पर स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं है?
दूसरे छात्रों के लिए बस, GNM छात्राओं के लिए इंतजार!
जानकारी के अनुसार औद्योगिक उपक्रमों द्वारा CSR के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए कॉलेज और हॉस्टल आने-जाने के लिए बस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
लेकिन GNM की छात्राओं के लिए अभी ऐसी सुविधा नहीं है।
CMHO का कहना है कि खनिज न्यास विभाग से बस की सुविधा दिलाने के लिए कलेक्टर से निवेदन किया जाएगा।
यानी सुविधा की जरूरत आज है, लेकिन समाधान के लिए अभी निवेदन किया जाना बाकी है।
सवाल फिर वही—
बस कब मिलेगी?
इसकी कोई स्पष्ट टाइमलाइन क्यों नहीं बताई जा रही?
स्थायी भवन कब मिलेगा?
कॉलेज पिछले करीब एक दशक से अपने स्थायी भवन के बिना संचालित होने की बात सामने आई है। वर्तमान में पिछले करीब 3 वर्षों से वर्किंग वूमंस हॉस्टल में कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
एक तरफ छात्राओं से बेहतर नर्स बनने की उम्मीद की जाती है, दूसरी तरफ संस्थान को अपना स्थायी भवन, पर्याप्त शिक्षक और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
क्या यह व्यवस्था नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता के अनुरूप है?
CMHO का दावा—व्यवस्था सुधारेंगे
कोरबा के CMHO डॉ. एसएन केसरी ने स्वीकार किया है कि शिक्षकों के सभी 6 स्वीकृत पद फिलहाल रिक्त हैं। स्थानीय स्तर पर 3 कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है और एक प्राचार्य पदस्थ हैं।
उन्होंने बताया कि छात्राओं को प्रैक्टिकल के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन फिलहाल बस की सुविधा नहीं है। बस के लिए खनिज न्यास विभाग से व्यवस्था कराने के संबंध में कलेक्टर से निवेदन करने की बात उन्होंने कही है।
शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी शासन को होने और जिला स्तर से समय-समय पर पत्राचार किए जाने की बात भी CMHO ने कही।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—कब तक?
अधिकारियों के पास अपनी सफाई है। शासन को पत्र भेजे जाने की बात है। बस के लिए कलेक्टर से निवेदन करने की बात है। व्यवस्था सुधारने का दावा भी है।
लेकिन छात्राओं और उनके अभिभावकों का सवाल इससे अलग है—
शिक्षक कब आएंगे?
स्थायी भवन कब मिलेगा?
बस कब मिलेगी?
थ्योरी की नियमित कक्षाएं कब होंगी?
और इन सबकी स्पष्ट समय-सीमा आखिर कब तय होगी?
क्योंकि नर्सिंग सिर्फ एक डिग्री या डिप्लोमा हासिल करने का नाम नहीं है। यह ऐसा पेशा है जहां प्रशिक्षित व्यक्ति के हाथों में मरीज की जिंदगी और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में सरकारी GNM कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार अब सिर्फ सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि छात्राओं के भविष्य और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है।























































































































































































































