सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक चला लापरवाहियों का सिलसिला… जिससे 29 साल के युवक की मौत!
कैजुअल्टी में हो रहा मरीजों की जान से खिलवाड़, आखिर कौन है जिम्मेदार? कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
कोरबा। जिले में सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों की कलई खुल गयी है. 15 सितंबर को इलाज के दौरान 29 वर्षीय युवक अरुण दास की मौत हो गई थी. परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल के डॉक्टरों और निजी अस्पतालों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. इसकी शिकायत कलेक्टर से भी की है. अब कलेक्टर ने इस मामले की जांच के लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया है. युवक की मौत के मामले में निजी और सरकारी दोनों स्तर के अस्पताल अब जांच के दायरे में हैं.
मेडिकल कॉलेज अस्पताल की भूमिका इस मामले में संदेह के दायरे में है. पहले लापरवाही की, इसके बाद एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी कर बताया कि वेंटीलेटर की सुविधा अस्पताल में दी गई थी. चीजों को तोड़ मरोड़ पर पेश करने का प्रयास किया गया. जबकि इस मामले में स्पष्ट तौर पर शिकायत में उल्लेखित किया गया है की वेंटीलेटर की सुविधा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मिली थी.
निजी अस्पताल शिवाय में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिली. जबकि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14 और 15 तारीख तक सीटी स्कैन,एक्स रे और सोनोग्राफी नहीं किया गया. जिससे युवत की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. परिजनों का यही आरोप है कि सरकारी अस्पताल में बिना जरूरी जांच के लापरवाही भरा इलाज किया गया. जिससे युवक की तबीयत बिगड़ गई. जबकि निजी अस्पताल शिवाय ने एन वक्त पर वेंटीलेटर खाली नहीं होने की बाद कहकर हाथ खड़े कर दिए. जिससे युवक की मौत हुई.
मृतक के भाई ने की है पूरे मामले की शिकायत और जांच की मांग :
मृतक युवक के भाई गुरुशरण सिंह ने इस पूरे मामले की शिकायत कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
शिकायत के अनुसार, पहले तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लापरवाही से मरीज की तबीयत बिगड़ी. इसके बाद निजी अस्पताल में वेंटिलेटर और सही समय पर चिकित्सीय सहायता न मिलने के कारण युवक को कई अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े, जिससे आखिरकार उसकी एम्बुलेंस में ही मौत हो गई.
मेडिकल कॉलेज अस्पताल और इसके बाद पहुंचे शिवाय :
मृतक के भाई गुरुशरण ने इस पूरे मामले का एक वीडियो बना कर भी सोशल मीडिया में पोस्ट किया है.
गुरुशरण ने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14 सितंबर को अरुण को भर्ती किया गया था. जहां उसका इलाज चल रहा था, यहां उसे कैजुअल्टी में रखा गया था. इसके बाद 15 सितंबर को उसकी तबीयत अधिक बिगड़ने लग, ब्लड टेस्ट किया गया था. लेकिन इस टेस्ट रिपोर्ट में जानकारी भी हाथ से लिखी गई थी. कोई प्रिंटेड रिपोर्ट नहीं थी. अधिक तबीयत बिगड़ने पर 15 सितंबर की रात को अरुण को सीधे आईसीयू में शिफ्ट करके वेंटीलेटर पर रख दिया गया. जबकि उसके पेट में सूजन था, सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद भी ना तो किसी तरह का छाती का एक्सरे किया गया, ना ही पेट की सोनोग्राफी, सीटी स्कैन किया गया. बिना टेस्ट के इलाज किया गया. ज्यादातर जूनियर डॉक्टर ही कैजुअल्टी में मौजूद थे. मैंने चिकित्सकों से जानकारी भी ली, मौके पर मौजूद नर्स से भी पूछा. जिसने नाजुक हालत होने की बात कही इसके बाद जब मरीज की तबीयत अधिक बिगड़ गई, तब 15 सितंबर की रात को मरीज को वहां से हमने निजी अस्पताल ले जाने का फैसला किया.
निजी अस्पतालों के चक्कर और वेंटिलेटर के लिए भटके :
शिकायत के मुताबिक परिजनों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में फोन पर असपताल के प्रबंधक स्वप्निल झा से बात कर वेंटिलेटर के उपलब्धता की जानकारी ली थी. आरोप है कि अस्पताल की तरफ से मरीज को लाने की बात कही गई, जिसके बाद वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस का किराया कर मरीज को देर रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच शिवाय हॉस्पिटल पहुँचाया गया.
परंतु वहाँ पहुँचने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया. इसके बाद एम्बुलेंस को पास के एमजीम हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर मौजूद नहीं थे. इसके बाद मरीज को कोसबाबड़ी स्थित एनकेएच हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी मरीज को एडमिट नहीं कराया जा सका.
इसी बीच, जब शिवाय हॉस्पिटल में दोबारा फोन पर संपर्क किया गया तो यह बताया गया कि अब वेंटिलेटर मशीन खाली है और मरीज को वापस ले आएं. परिजन मरीज को लेकर दोबारा शिवाय हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ जाँच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों का दर्द है कि लगभग 2 से 3 घंटे तक मरीज एम्बुलेंस में ही एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा. समय पर इलाज और वेंटिलेटर न मिलने से उसकी जान चली गई.
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकारी अस्पताल में लापरवाही और बना जांच इलाज से मरीज की तबीयत बिगड़ी. जबकि निजी अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिलने से मरीज की जान चली.
17 सितंबर को भी कैजुअल्टी में हुई थी गहमागहमी :
17 सितंबर की दोपहर के समय भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गहमागहमी भरा माहौल था.
बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ता एक एक्सीडेंटल केस लेकर अस्पताल के इमरजेंसी/कैजुअल्टी वार्ड में पहुंचे थे. लेकिन यहां मौजूद चिकित्सक ने पर्ची के बिना इलाज करने से इनकार कर दिया, जबकि मरीज़ बेहद गंभीर व्यवस्था में था. इस विषय में समाजसेवी और बजरंग दल के जिला अध्यक्ष राणा ने बताया कि कैजुअल्टी में डॉ रविकांत राठौर मौजूद थे. जो इलाज के पहले पर्ची की मांग कर रहे थे. जिससे मरीज की तबीयत काफी बिगड़ रही थी. छोटी सी बात काफी बड़ी हो गई. काफी गहमागहमी भरा माहौल हो गया था. काफी बहस हुई, कैजुअल्टी वार्ड के समक्ष जो नगद काउंटर है. वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में देखा जा सकता है. 17 सितंबर के दोपहर के समय यह पूरा वाकया हुआ था.
जांच के आदेश दिए गए :
इलाज में लापरवाही की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने जांच टीम का गठन कर दिया है. कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि दोनों मामलों में जांच टीम का गठन कर दिया गया है. जिसकी जांच की जा रही है, जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी मामले में कार्रवाई की जाएगी.







