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नकटीखार में फिर गरमाया जमीन और राजस्व का मुद्दा, 8 मांगों को लेकर ग्रामीणों का अल्टीमेटम

कोरबा। ग्राम पंचायत नकटीखार में वर्षों से लंबित जनहित के मुद्दों को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों की नाराजगी सामने आई है। जनपद पंचायत क्षेत्र क्रमांक 20 की सदस्य मोनिका अरविंद भगत के नेतृत्व में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर गांव की आठ प्रमुख मांगों के निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन को 10 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर नकटीखार में चक्काजाम कर आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन में सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, भूमि रिकॉर्ड में त्रुटि, पुराने राजस्व प्रकरण और खेल मैदान सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। खास बात यह है कि वर्तमान ज्ञापन में उठाया गया भूमि रिकॉर्ड और नक्शा सुधार का मुद्दा नया नहीं है। नकटीखार में जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याएं वर्षों से विवाद का कारण बनती रही हैं।

आठ प्रमुख मांगों पर प्रशासन का ध्यान

ग्रामीणों ने नकटीखार शासकीय प्राथमिक शाला से तालाबपारा जाने वाले मार्ग में तालाब के पास पुलिया निर्माण और आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को परेशानी न हो।

ज्ञापन में शासकीय प्राथमिक शाला नकटीखार के लिए स्वीकृत दो भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों के मुताबिक भवन निर्माण पूरा नहीं होने के कारण बच्चों को पुराने जर्जर भवन में पढ़ना पड़ रहा है और इस संबंध में पहले भी प्रशासन के समक्ष शिकायतें की जा चुकी हैं।

सबसे महत्वपूर्ण मांगों में मसनहाती ग्राम के समय हुए बंदोबस्त के दौरान नक्शे में हुई त्रुटियों का सुधार शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि नक्शे की गलतियों के कारण किसानों को तहसील और न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके लिए गांव में राजस्व विभाग का कैंप लगाकर मौके पर समस्या का समाधान करने की मांग की गई है।

इसी तरह कई किसानों की पुरानी जमीन बंदोबस्त के बाद वर्तमान रिकॉर्ड और नक्शे में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज होने का मामला भी उठाया गया है। ज्ञापन के अनुसार कुछ मामले 13-14 वर्ष बीतने के बाद भी तहसील न्यायालय में लंबित हैं। ग्रामीणों ने वर्तमान रिकॉर्ड में सुधार के लिए जल्द गांव में कैंप लगाकर इन मामलों का निराकरण करने की मांग की है।

इसके अलावा नकटीखार के भालूसटका में देवरास मोहल्ला जाने वाले मार्ग पर कांक्रीट सड़क, अटल चौक से अंधारदहरा की ओर कांक्रीट सड़क तथा नकटीखार के ऊपर मुहल्ला होते हुए मुलसीडीह जाने वाले मार्ग का डामरीकरण कराने की मांग रखी गई है।

भालूसटका खेल मैदान को लेकर भी ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि खेल मैदान को अब तक सामुदायिक वनाधिकार के तहत पट्टा नहीं दिया गया है। धार्मिक एवं खेल गतिविधियों के लिए मैदान का तत्काल पट्टा दिए जाने की मांग की गई है।

पुराने अखबार की रिपोर्ट में भी सामने आया था जमीन का विवाद

नकटीखार में जमीन और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर उठे सवालों की पृष्ठभूमि पुरानी है। वर्षों पहले प्रकाशित अखबार की रिपोर्ट में भी झगरहा, नकटीखार और दादर के नक्शे को लेकर विवाद, जमीनों के सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का मुद्दा सामने आया था। रिपोर्ट में जमीन विवादों से जुड़े मामलों को देखते हुए प्रशासन द्वारा पूर्व में किए गए सर्वे को निरस्त करने की तैयारी का उल्लेख किया गया था।

उस समय की रिपोर्ट में सर्वे के दौरान जमीन के नंबरों में बड़ी त्रुटियां सामने आने, सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त के आरोप, जमीन पर वर्षों से कब्जा होने के बावजूद रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने तथा जमीन से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ने जैसी बातें सामने आई थीं। रिपोर्ट में धारा 89 से संबंधित मामलों की बढ़ती संख्या और इन मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया था।

पुरानी रिपोर्ट में तत्कालीन प्रशासन की ओर से सर्वे के दौरान सामने आई गड़बड़ियों की जांच और पुराने अभिलेखों का नए रिकॉर्ड से मिलान किए जाने की बात कही गई थी। यानी नकटीखार में जमीन के नक्शे, स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर उठ रहे सवालों का सिलसिला आज का नहीं, बल्कि काफी पुराना है।

पुराने विवादों के बीच फिर उठी रिकॉर्ड सुधार की मांग

अब वर्ष 2026 में ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए नए ज्ञापन में भी नक्शा त्रुटि सुधार, वर्तमान रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय भूमि से जुड़े मामलों और वर्षों से लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण की मांग की गई है। इससे साफ है कि पुराने समय में सामने आए भूमि और राजस्व संबंधी विवादों के कुछ मुद्दे आज भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।

हालांकि पुराने मामलों में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर उस समय प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और जांच की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान ज्ञापन से यह संकेत मिलता है कि भूमि रिकॉर्ड में सुधार और लंबित प्रकरणों का पूर्ण समाधान अभी भी ग्रामीणों की प्रमुख जरूरतों में शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आवेदन और शिकायतों के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। यही वजह है कि इस बार ज्ञापन में 10 दिनों की समय-सीमा तय करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती

नकटीखार में अब प्रशासन के सामने सिर्फ सड़क, स्कूल और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों का समाधान करने की चुनौती नहीं है, बल्कि वर्षों पुराने भूमि रिकॉर्ड और राजस्व मामलों को भी सुलझाने की जिम्मेदारी है। यदि गांव में राजस्व शिविर लगाकर नक्शा एवं रिकॉर्ड की त्रुटियों का निराकरण किया जाता है और लंबे समय से लंबित प्रकरणों पर कार्रवाई होती है, तो इससे कई किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि 10 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो नकटीखार में चक्काजाम किया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस चेतावनी के बाद कितनी जल्दी कार्रवाई शुरू करता है और वर्षों से चले आ रहे भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है।