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नन्हे हाथी की छठी मनाने जुटे सात गांवों के ग्रामीण, मानव-हाथी सह-अस्तित्व का दिया संदेश

कोरबा वनमंडल के वन परिक्षेत्र करतला अंतर्गत साजापानी क्षेत्र में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर छठी का सामुदायिक आयोजन किया गया। नन्हे हाथी का जन्म दशहरे के दिन, 20 अक्टूबर 2026 को हुआ था। ग्रामीणों ने इस खुशी को उत्सव के रूप में मनाकर वन्यजीवों के प्रति अपनापन, संवेदनशीलता और संरक्षण का संदेश दिया।

सात गांवों के ग्रामीणों ने साझा की खुशी

साजापानी सहित आसपास के सात गांवों के ग्रामीणों ने इस आयोजन में अपनी भागीदारी निभाई। उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि हाथी हमारी प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नन्हे हाथी के जन्म की खुशी साझा करना मानव और वन्यजीवों के बीच आपसी तालमेल और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने वाला सराहनीय प्रयास है।

हाथियों के प्रति सकारात्मक सोच की मिसाल

आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी से लोगों में चिंता और डर की स्थिति बन जाती है। लेकिन साजापानी के ग्रामीणों ने नन्हे हाथी के जन्म को खुशी के अवसर के रूप में मनाकर एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। यह पहल बताती है कि जागरूकता, जनभागीदारी और संवेदनशीलता से वन्यजीवों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है। ग्रामीणों का यह प्रयास दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।

उपवनमंडलाधिकारी ने ग्रामीणों की पहल को सराहा

कार्यक्रम में उपवनमंडलाधिकारी मणिकांत वर्मा ग्रामीणों के आमंत्रण पर शामिल हुए। उन्होंने इस संवेदनशील और सकारात्मक पहल के लिए सभी ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि साजापानी के ग्रामीणों ने हाथियों के प्रति लगाव और सह-अस्तित्व की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि दूसरे गांवों के ग्रामीण भी इसी तरह वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता रखें और वन विभाग के साथ सहयोग करें, तो मानव-हाथी संघर्ष को कम करने तथा हाथियों और ग्रामीणों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में काफी मदद मिल सकती है।

हाथियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए वन विभाग के प्रयास

वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में रात के समय गश्त की जाती है और मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को सतर्क किया जाता है।

हाथियों की मौजूदगी से संबंधित जरूरी सूचनाएं व्हाट्सएप समूहों के जरिए भी साझा की जाती हैं। ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है कि वे हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, उनके नजदीक न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें।

मानव-हाथी संघर्ष कम करना वन विभाग का प्रयास

वन विभाग का प्रयास है कि ग्रामीणों की भागीदारी और आपसी समन्वय से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम किया जाए। इसके साथ ही वन्यजीवों का संरक्षण हो और ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

इस दिशा में साजापानी के ग्रामीणों द्वारा की गई पहल दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।

वन विभाग की ग्रामीणों से अपील

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें, उनकी गतिविधियों की सूचना समय पर विभाग को दें और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयासों में अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित करें।

संदेश: “हाथियों के प्रति संवेदनशीलता, जंगल एवं वन्यजीवों का संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा—मानव-हाथी सह-अस्तित्व हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”