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इलाज के लिए अस्पताल-दर-अस्पताल भटकता रहा 29 वर्षीय युवक, एम्बुलेंस में थमी सांसें

परिजनों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल की कैजुअल्टी और निजी अस्पतालों पर लगाए गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप : मेडिकल कॉलेज की कैजुअल्टी में नहीं हुई जांच… फिर मरीज ने एम्बुलेंस में तोड़ा दम

​कोरबा। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक गंभीर घटना सामने आई है. जहाँ इलाज के दौरान एक युवक की मौत हो गई है. परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल के डॉक्टरों और निजी अस्पतालों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. मृतक के चाचा कैलाश दास द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, वेंटिलेटर और सही समय पर चिकित्सीय सहायता न मिलने के कारण युवक को कई अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े, जिससे आखिरकार उसकी एम्बुलेंस में ही मौत हो गई. मृतक के भाई ने इस पूरे मामले का एक वीडियो बना कर भी सोशल मीडिया में पोस्ट किया है. जिसकी शहर में जमकर चर्चा है.
मेडिकल कॉलेज अस्पताल की कैजुअल्टी में लापरवाही बरतने के कई लगातार मामले सामने आए हैं. इसके बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा कार्रवाई नहीं की गई है. डॉ रविकांत राठौर और डॉ बीके झरलिया के पास है.

इस घटना के अलावा 17 और 18 सितंबर के दरमियानी रात को भी कैजुअल्टी के प्रभारी डॉ रविकांत राठौर और बजरंग दल के जिला अध्यक्ष राणा मुखर्जी की जमकर बहस हुई थी. कैजुअल्टी में पहुंचने पर एक मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने के कारण अस्पताल परिसर में देर रात जमकर हंगामा हुआ था. इस मामले में भी राणा ने बताया कि इलाज करने में अनावश्यक देरी और लापरवाही बरती जा रही थी. डॉ राठौर से हमने गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे मरीज का इलाज तत्काल करने की बात कही, लेकिन वह भड़क गए. पूर्व में भी इनकी कई मामलों में लापरवाही की शिकायतें हैं. इस मामले की भी हम लिखित शिकायत करेंगे. कैजुअल्टी में पहुंचे परिजन के साथ मरीजों से भी डॉक्टर राठौर का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक रहता है। पूर्व में इनकी हरकतों की वजह से इन्हें कई बार चेतावनी दी गई है। इसके बावजूद इनके आचरण में कोई सुधार नहीं है। अस्पताल के भीतर भी सहकर्मियों ने भी इनकी मौखिक शिकायत की है।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल का कैजुअल्टी एक बेहद संवेदनशील विभाग है, कारण चाहे जो भी हो इन दिनों मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कैजुअल्टी में आने वाले मरीजों को बेहद विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. कई मरीजों की जान जा रही है, पीड़ित लगातार शिकायत कर रहे हैं. अब पीड़ित स्वास्थ्य मंत्री और शासन स्तर पर शिकायत की बातें भी कह रहे हैं.

जिला अस्पताल में बिगड़ी तबीयत, नहीं थी जाँच की सुविधा :
ताज़ा ​शिकायत पत्र के मुताबिक, कंचंदा (जांजगीर-चापा) निवासी 29 वर्षीय अरुण दास को 14 सितंबर 2026 को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उपचार के दौरान 15 सितंबर को अचानक मरीज की स्थिति बिगड़ने लगी. परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में न तो सोनोग्राफी हुई और न ही सीटी स्कैन की सुविधा मिल सकी. हालत गंभीर होने पर मरीज को श्वास नली की मशीन (वेंटिलेटर) पर रखा गया, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर परिजनों ने उसे किसी निजी अस्पताल में ले जाने का निर्णय लिया.

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल एक रेडियोलॉजिस्ट हैं, जो दिन भर में औसतन 40 सोनोग्राफी करते हैं. इमरजेंसी के समय कई बार मरीजों को दिक्कत होती है. इसी तरह सीटी स्कैन मशीन लगाने की प्रक्रिया वर्षों से चल रही है. जो अब भी कागजों में है.
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कैजुअल्टी से ही लापरवाही की शुरुआत हुई, यहां मरीज का ठीक तरह से ध्यान रखा गया होता अच्छा इलाज किया गया होता, तो उसकी जान बच सकती थी.

​निजी अस्पतालों के चक्कर और वेंटिलेटर के लिए भटके :
शिकायत के मुताबिक ​परिजनों ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में फोन पर असपताल के प्रबंधक स्वप्निल झा से बात कर वेंटिलेटर की उपलब्धता की जानकारी ली थी. आरोप है कि अस्पताल की तरफ से मरीज को लाने की बात कही गई, जिसके बाद वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस का किराया कर मरीज को रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच शिवाय हॉस्पिटल पहुँचाया गया.
​परंतु वहाँ पहुँचने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया. इसके बाद एम्बुलेंस को पास के जैन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर मौजूद नहीं थे. इसके बाद मरीज को कोसबाबड़ी स्थित एनकेएच हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी मरीज को एडमिट नहीं कराया जा सका.

​एम्बुलेंस में ही तड़पकर थम गई साँसें :
शिकायत के अनुसार ​इसी बीच, जब शिवाय हॉस्पिटल में दोबारा फोन पर संपर्क किया गया तो यह बताया गया कि अब वेंटिलेटर मशीन खाली है और मरीज को वापस ले आएं. परिजन मरीज को लेकर दोबारा शिवाय हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ जाँच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों का दर्द है कि लगभग 2 से 3 घंटे तक मरीज एम्बुलेंस में ही एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा. समय पर इलाज और वेंटिलेटर न मिलने से उसकी जान चली गई.

​इंसाफ की गुहार और कार्रवाई की माँग :
​मृतक के अपने पीछे 6 महीने का पुत्र और पत्नी हैं. इस अनाथ बच्चे और बेसहारा पत्नी के लिए परिजनों ने शासन-प्रशासन से कड़े शब्दों में न्याय की गुहार लगाई है. मृतक के चाचा कैलाश दास ने मांग की है कि इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जाँच की जाए और अस्पताल प्रबंधन व संबंधित लापरवाह लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए.
ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े.

मामले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉ गोपाल सिंह कंवर का कहना है कि कैजुअल्टी डिपार्टमेंट के प्रभारी दो अलग-अलग चिकित्सक हैं. 6 डॉक्टर की टीम है. जिनके द्वारा पहले तो मरीज को स्टेबल किया जाता है. इसके बाद इमरजेंसी में अलग-अलग विभाग के डॉक्टर मरीज का इलाज करते हैं. इलाज में लापरवाही की शिकायत की गयी है, तो इसका संज्ञान लेंगे. लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी.